Monday, 9 February 2009

मेरी लाख कोशिश के बाद भी मैं आज तक ये पता नहीं लगा सका के उस्मान कौन है? पता नहीं कौन है जो मुझसे एस तरह से बदला ले रहा है? जिसकी वजह से सभी ये समझने लगे हैं की मैं मिट्ठू को बदनाम कर रहा हूँ। हे भगवन उस उस्मान को ऐसी मौत देना जिसके बारे में कोई सोच भी न सके। उसने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा। आज मैं मिट्ठू से भी नहीं मिल सकता हूँ। वो समझती है की मैंने ही उस्मान को बताया है, लेकिन भगवान् ही जानता है की मैंने क्या किया है? और न ही मैं वापस माँ के पास जा सकता हूँ, क्योंकि मैं ख़ुद ही वहां से भाग आया था की मुझे मिट्ठू ने बुलाया था की तुम यहाँ आ जाओ फिर हमलोग यहाँ से दूर सबसे अलग चले जायेंगे, लेकिन वो तो मिलने तक नहीं आयी। धीरे धीरे कर के सब ने मुझसे मुहं फेर लिया, लेकिन पता नहीं जिंदगी कब मुहं फेरे गी? अब तो सिर्फ़ उसका ही इन्तजार है, क्योंकि अपने से मेरा अंश तो मिट्ठू ने २८ नवम्बर को ही निकाल दिया था, और कल उसने अपने नाम से मेरा नाम भी हटा दिया। खुश रहना मिट्ठू। तुम्हारे सारे दुःख मेरे और मेरी सारी खुशियाँ तुम्हारी।

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