Thursday, 29 January 2009

२९-०१-२००९

आज मैंने दिन में कुछ नहीं खाया। सुबह उठते ही सर बहुत दर्द कर रहा था, और ऐसा लग रहा था की बदन में बिल्कुल जान नहीं है। मिट्ठू की बहुत याद आ रही थी। काम पे जाने की हिम्मत नहीं हुई। अगर ऐसा ही रहा तो पूरे पैसे नहीं मिल पाएंगे और तब मिट्ठू के लिए गिफ्ट कैसे खरीद पाऊँगा? दिन भर बिस्तर पे ही लेटा रहा। बिस्तर क्या वही दो कुर्सियां। सुबह होते ही लोग आना शुरू हो जाते हैं। दिन किसी तरह से बीता। रहमत से जॉब के बारे में बात की, लेकिन बात करके ऐसा लगा की मुश्किल है। अब ज्यादा पैसे भी नहीं बचे हैं जो और किसी से बात कर पाऊँ। मिट्ठू से बात करने का बहुत मन कर रहा है लेकिन क्या करूँ अगर फ़ोन करता हूँ तो उसको तकलीफ होगी। रात में भी खाना खाने जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी, भूख भी बहुत जोर से लगी थी फिर भी ऐसे ही सो गया।

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