Tuesday, 13 January 2009

आज मैं ट्रेन पे चढ़ते समय प्लेटफोर्म पे गिर गया। पाँव काटने से बच गया अगर वो औरत ने मुझे नहीं खीचा होता तो मेरा पैर कट ही जाता। स्टेशन के ही पोलिश वाले ने मुझे हस्पताल में भरती करवाया। मेरे पास पैसे भी नहीं थे और मुझे होश भी नहीं था। बाद में नर्स ने बताया के ये सरकारी हस्पताल है, यहाँ पैसे नहीं लगते। आठ दिनों तक वहीँ पड़ा रहा। न उठ सकता था न ही चल सकता था। दर्द बहुत होता था लेकिन क्या करता अपने पापों की सजा तो मुझे ही भुगतनी पड़ेगी। वहीँ बेद पे पड़े पड़े दिल्ली का हस्पताल याद आ गया। जब मिट्ठू ने मुझे भरती करवाया था। करवा चौथ के दूसरे दिन। और उसी कर्वाचोथ के दिन मिट्ठू प्रतीक के घर उसके साथ गई थी, और उसने वहां व्रत के बावजूद चाय पी थी। और रात को लाजपत नगर आ के बिना मुझे देखे खाना भी खा लिया और मम्मा से मेरे लिए प्रसाद के नाम पर कला रसगुल्ला भिजवा दिया था। जबकि उसको पता था की मैंने भी व्रत रखा हुआ था।
आज मुझे बहुत दर्द हो रहा था और रोना भी आ रहा था लेकिन क्या करता रो भी नहीं सकता था, मिट्ठू ने अपनी कसम दी थी मुझे की रोना मत। लेकिन मुझे लगता है की मिट्ठू ने मुझसे किया हुआ अपना आखिरी वादा तोड़ दिया। उसने मुझसे प्रोमिस किया था की वो प्रतीक से बात नहीं करेगी। लेकिन आज मुझे यकीन हो गया है की उसने अपना वादा तोड़ दिया है। क्योंकि मैंने उसको बोला था अगर वो अपना वादा तोडेगी तो उसकी सजा भगवन मुझे देगा। और भगवन ने मुझे सज़ा दे दी। लेकिन मिट्ठू मैं तुम्हारी कसम मरते दम तक निभाऊंगा याद रखना।

No comments:

Post a Comment