Friday, 30 January 2009

आज सुबह उठने में देर हो गयी। आँख खुली तो ७:१० बजे वाली ट्रेन आ चुकी थी। जल्दी से तैयार हो कर निकला तो काम पे पहुँचने में देर हो गयी। आज सर के ऑफिस में कोई भी नहीं था तो मैंने चपरासी से पूछ के कंप्यूटर पे अपना मेल चेक किया। अभी मैंने लोगिन ही किया था तभी अविरल ऑनलाइन आया, तो मैंने पुछा कैसे हो भाई? ये देख कर उसने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने फिर थोडी देर बाद पुछा, भूल गए क्या? फिर भी उसने कोई जवाब नहीं दिया, तो मुझे लग गया की वो मुझसे बात नहीं करना चाहता है। ठीक ही है न, जब अपनों ने आवाज सुन कर फ़ोन बंद कर दिया तो गैरों से क्या उम्मीद। मैंने उसे उसकी बहन की शादी की मुबारकबाद दे कर छोड़ दिया। उसके बाद वो भी इंविसिबल हो गया। उसके तुंरत बाद ही अंजना ऑनलाइन आयी और मुझे ऑनलाइन देख कर ऑफ़लाइन हो गयी। आज रहमत से बात की तो उसने बोला की अपना सीवी भेज दो शायद नौकरी का कुछ हो जाएगा। मैंने सीवी भेज तो दिया है लेकिन पता नहीं ऐसा लगता है की कुछ नहीं होगा। या शायद कोई होने नहीं देगा। देखें भगवन को क्या मंजूर है? दोपहर से ही सर बहूत दर्द कर रहा था, इस लिए मालिक को बोल के वापस चला आया। ये तो वैसा ही दर्द है की १३ december २००६ को हुआ था। कुछ भी साफ़ नहीं दिख रहा था। सिर्फ़ आँख के सामने मिट्ठू का चेहरा आ रहा था। आज लगता है की रात भर दर्द के साथ ही लेटना पड़ेगा, खैर कोई बात नहीं अब तो दर्द के साथ अपनी दोस्ती हो गयी है। हे भगवान् मिट्ठू को खुश रखना। अलविदा...............

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